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शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) - व्याख्या

30 Jun 2023|
4 min read |
by ICICI Securities Team

पूंजीगत लाभ का अर्थ

पूंजीगत लाभ किसी पूंजीगत परिसंपत्ति में आपके निवेश को बेचने पर प्राप्त होने वाला प्रतिफल है। इन परिसंपत्तियों में शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, अचल संपत्ति आदि शामिल हैं। अतः, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इन बिक्री से प्राप्त राशि को 'पूंजीगत निवेश पर लाभ' कहा जाता है।

शेयरों के मामले में, पूंजीगत लाभ तब होता है जब उन्हें कम कीमत पर खरीदा जाता है और अधिक कीमत पर बेचा जाता है। जब आपको लाभ होता है, यानी पूंजीगत लाभ, तो यह आपकी आय में जुड़ जाता है और इस प्रकार कर योग्य होता है। इस कर को पूंजीगत लाभ कर कहा जाता है।

पूंजीगत लाभ कर उस अवधि पर निर्भर करता है जिसके लिए परिसंपत्ति या प्रतिभूति को रखा जाता है।

यदि किसी शेयर को 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता है और फिर उससे लाभ कमाया जाता है, तो वह दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कहलाता है। इसी प्रकार, 1 वर्ष के भीतर अर्जित कोई भी लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (STCG) कहलाता है। शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) पर कर कैसे लगता है? विभिन्न परिसंपत्तियों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर अलग-अलग तरीके से लगता है। जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो इसे इक्विटी निवेश कहा जाता है। LTCG के लिए पात्र होने के लिए, आपको अपने निवेश को कम से कम 1 वर्ष तक रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आपने इक्विटी निवेश में ₹1 लाख का निवेश किया और एक वर्ष बाद उसे ₹1.3 लाख में बेच दिया, तो आपका दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ ₹30,000 होगा। यह उल्लेखनीय है कि इक्विटी निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ 'सूचकांक' के अधीन नहीं है। इसका अर्थ है कि इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ मुद्रास्फीति के लिए समायोजित नहीं किया जाएगा।

प्रति वर्ष ₹1 लाख तक के पूंजीगत लाभ पर पूंजीगत लाभ कर से छूट है। बजट 2023 के अनुसार, शेयरों या इक्विटी निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर लाभ पर 10% बनी रहेगी, जबकि शेयरों या इक्विटी निवेश पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर 15% की दर से लगाया जाएगा।

10% की दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर दर लागू होगी यदि निवेशक ने अपने शेयरों की खरीद और बिक्री के दौरान प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) का भुगतान किया है। यह तब भी लागू होगा जब किसी इक्विटी फंड में उसका निवेश किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाता है और एसटीटी का भुगतान किया जाता है।

इसके अलावा, ईएलएसएस (यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) में निवेश पर अर्जित पूंजीगत लाभ भी कर योग्य है। ये योजनाएं निवेशित राशि को विभिन्न बाजार पूंजीकरण वाले विभिन्न शेयरों में वितरित करती हैं और 3 साल की अवधि के लिए लॉक-इन होती हैं।

इस अवधि के समाप्त होने के बाद, इंडेक्सेशन के लाभ के बिना 10% पूंजीगत लाभ कर लागू हो जाता है। हालांकि, कर के लिए पात्र होने के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) 1 लाख रुपये से अधिक होना चाहिए।

31 जनवरी, 2018 के बाद इक्विटी निवेश पर एलटीसीजी कर की गणना कैसे की जाती है

भारत में 2018 में इक्विटी निवेश के लिए बिना किसी इंडेक्सेशन लाभ के एलटीसीजी को फिर से लागू किया गया था। मान लीजिए कि एक निवेशक ने सितंबर 2020 में 1 लाख रुपये का इक्विटी निवेश किया और नवंबर 2021 में शेयर 1.4 लाख रुपये में बेच दिए। इस मामले में, उनके 40,000 रुपये के पूंजीगत लाभ को एलटीसीजी के रूप में गिना जाएगा क्योंकि उन्होंने 12 महीने की समय सीमा के बाद अपने शेयर बेचे थे। इस पूंजीगत लाभ पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर 40,000 का 10% यानी 4,000 रुपये होगा।

धारा 54F के तहत शेयरों से प्राप्त दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर छूट

अधिक पढ़ें: दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की गणना कैसे की जाती है?

आयकर अधिनियम की धारा 54F अचल संपत्ति में पुनर्निवेश के माध्यम से इक्विटी बाजारों से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर छूट से संबंधित है। इस खंड में कहा गया है कि इक्विटी शेयरों की बिक्री से प्राप्त कुल राशि को एक नई आवासीय संपत्ति खरीदने में पुनर्निवेशित किया जाना चाहिए – यदि निवेशक कर छूट का दावा करना चाहता है तो पूरी राशि, न कि केवल पूंजीगत लाभ। यह खरीद इक्विटी बिक्री से 1 वर्ष पहले या इक्विटी बिक्री की तारीख से 2 वर्ष के भीतर की जानी चाहिए।

एक निवेशक पूंजीगत लाभ का उपयोग नई संपत्ति के निर्माण के लिए भी कर सकता है, लेकिन यह इक्विटी बिक्री की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के भीतर पूरा होना चाहिए। यदि खरीदी गई संपत्ति को खरीद के 3 वर्ष के भीतर बेच दिया जाता है तो यह छूट रद्द की जा सकती है।

आईटीआर फाइलिंग में शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) का खुलासा कैसे करें?

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आईटीआर-2 और आईटीआर-3 फॉर्म में बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार:

व्यक्तियों के साथ-साथ हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) को भी शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण से प्राप्त दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTG) को ITR-2 फॉर्म के खंड B7 में प्रकट करना होगा। (यदि वे इन लाभों को "व्यवसाय या पेशे से आय" के रूप में वर्गीकृत नहीं करते हैं।)

इसके अतिरिक्त, अनिवासियों को, जिन्हें शेयरों की बिक्री या हस्तांतरण से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ प्राप्त हुआ है, उन्हें ITR-2 और ITR-3 फॉर्म के क्रमशः खंड B7 और B8 में इसे प्रकट करना होगा।

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